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लम्हें.....

ढूंड़ता हूँ उन हसीं लम्हों को, जो वक्त की रेत मैं कहीं दफन हो गये, मालाएं पिरोई थी मैंने सपनो की, बिखर कर अंधेरों मैं जो कहीं खो गये, जलाया था मैंने जिन कागज़ के टुकड़ों को, क्यूँ वही टुकड़े यादों के निशान हो गये, किये थे जो मुकाम हासिल ऊँचाइयों के, आज क्यों वो ही मुकाम अनजाने हो गये, बनाना चाहता था उस गैर को भी अपना, पर मेरे अपने ही मुझसे जो खफा हो गये, मंज़र थे मेरी आँखों के सामने कुछ ऐसे, मेरे इन गहरे ज़ख्मो के जो गवाह हो गये, मिला वही जो लिखा था मेरी तकदीर में , क्यूँ इस कदर ना जाने वो मेरे खुदा हो गये, बिछड़ कर झुलसता रहा गमों की आग में, लगता है जैसे पश्यताप भी गुनाह हो गये, रोता रहा रात भर सिसकते हुते कोने में, रूठ कर कुछ मेरे अपने दूर मुझसे यूं हो गये, जिंदा हूँ न जाने ऐ ज़िन्दगी किस तरह मैं , लगता है मौत से भी रास्ते  ये जुदा हो गये.........

मुझसे जाने क्या ये ज़िन्दगी चाहती है (my first poem-11th standard)

मुझसे जाने क्या ये ज़िन्दगी चाहती है, हर मोड़ पर एक नया इम्तेहान लाती है, कभी इस नादान दिल को रुलाती है, कभी इस नादान दिल को जलाती है, मुझसे जाने क्या ये ज़िन्दगी चाहती है, इस दिल के करीब हर इंसान को सताती है, इस दिल की क्या खता जो तू मुझसे रूठ जाती है, पर एक लम्हा ऐसा भी आता है जब ये तुझे मानती है, मुझसे जाने क्या ये ज़िन्दगी चाहती है, मुझे हर लम्हा हर पल तेरी याद आती है, पर ना जाने क्यूँ तू मुझे ही गुनेहगार बताती है, ये सोच कर ही मेरी आँखें भर आती हैं, मुझसे जाने क्या ये ज़िन्दगी चाहती है, ना जाने यादें याद क्यों रह जाती हैं, कभी हसती हैं तो कभी रुलाती हैं, ज़िन्दगी की यही रीत है चलती जाती है, मुझसे जाने क्या ये ज़िन्दगी चाहती है, तनहा है सफ़र एक हमसफ़र चाहती है, न करो मोहब्बत तो ज़िन्दगी सूनी लगती है, करो जो मोहब्बत तो मुश्किलें राह सजाती हैं, मुझसे जाने क्या ये ज़िन्दगी चाहती है, यारों की यारी ना जाने क्या क्या कराती है, भूल जाते हैं गम खुशियाँ ही याद आती हैं, कुछ गलतियाँ कुछ शरारत नज़र आती हैं, ऐसी यादें होंठों पे मुस्कुराहट छोड़ जाती हैं, मुझसे जाने क्या ये ज़िन...

ज़िन्दगी

रोज़ रोते हुए कहती है मुझसे मेरी ये ज़िन्दगी, एक इंसान की खातिर मुझे यूँ बर्बाद तो ना कर, यूँ जिंदा रहने की कोई एक वजह तो बता, खुद अपनी मौत का कारण तैयार तो ना कर, मिलता नहीं हर बार जिसे चाहें जान ले तू, अगर मिले तो उसका अपमान तो ना कर, किस्से कहानियां तो बहुत बनाती है ये दुनिया, उस झूठे प्यार पर इतना गुमान तो ना कर, कागज़ की कश्तियाँ डूब जाती हैं लहरों में, उनके वजूद को इस तरह गुमनाम तो ना कर, तनहा रहना है अब तो उम्र भर के लिए, ये सोच कर खुद को यूँ परेशां तो न कर, तोड़ा था ये नादान दिल तेरा जिसने, उस बेवफा के जाने का मलाल तो ना कर, भीड़ में रहा तू अकेला कुछ वक्त के लिए, उस वक्त के लौटने का ख्याल तो ना कर, किस्मत का नाम देता रहा उसके फैसले को, किस्मत को उसके इतने सामान तो ना कर, धोखा खाता रहा चुप चाप क्यूँ तू खड़ा खड़ा, धोखे को प्यार मैं बदलने का अरमान तो ना कर, एहसास तो तेरे दिल में रहेगा हमेशा उसका, उसे मिटाने के लिए खुद को बेहाल तो ना कर, इस दिल की सुर्ख दीवार पर लिखा था नाम जिसका, कहती हैं निगाहें ,उसके आने का इंतज़ार तो ना कर, रूठ कर क्यूँ बैठा है तू बेखबर द...

शहीद

तेरा बेटा वतन की रक्षा करके वापस लौटेगा, घर से निकलते वक़्त उन्होंने माँ से कहा था, इस महान देश भारत की खातिर सर कलम करा, लहू उन शहीद जवानों का सरज़मीन पर बहा था, नहीं मालूम था उस मासूम माँ को वहां, उस सरहद पार गीदड़ घात लगाये थे, घनी धुंद और कोहरे को हथियार बना, वो डरपोक गीदड़ सरहद में घुस आये थे, गीदड़ों वाला काम किया उन जानवरों ने, नोच-खसोट कर लाशों को छोड़ वो भाग गए, किया होता हम पर वार सामने से उन्होंने, अगर डरपोक और कायर वो ना होते, ले जाते उन्हें वो अपनी नापाक ज़मीन पर, वो ज़मीन पाक कर देता लहू उन लाशों का, उस माँ ने कहा मुझे गर्व है अपने बेटे पर, जो कहलाया वो शहीद इस माँ भारत का, नापाक आँखें नोंची हैं हम शेरो ने हर बार, जब झक्जोरा है किसी ने सम्मान भारत का, शेर हैं हम,इस बार भी सामने से ही करेंगे वार, दिखाएँगे पाकिस्तान को दम ख़म भारत का, सत्ता के गलियारों में बेठें देशद्रोहियो से, बस इतना ही अब में कहना चाहता हूँ , छोड़ दो ये भारत देश तुम तमीज़ से, वर्ना हथियार उठाना में भी जानता हूँ, आम आदमी समझ कर जेसे अब तक, तुम लोगो ने हम मासूम लोगो को लूटा है, हिली ह...